Monday, June 24, 2019

प्रशंसा (Praise)

प्रशंसा क्या है ? (What is praise?) कौन प्रशंसा का पात्र है ? (Who is worthy of praise?) प्रशंसा किसकी और कैसे करनी चाहिए ? (Who should praise and how?) अपनी प्रशंसा सुनकर व्यक्ति की क्या प्रतिक्रिया होनी चाहिए ? (What should be the reaction of the person after listening to his praise?) प्रशंसा के क्या हानि-लाभ हैं ? (What are the benefits of praise?) आदि प्रश्नों का सटीक विवेचन मनीषियों एवं विचारकों की दृष्टि से | 

जैसे चाँदी की परख कुठाली पर और सोने की परख भट्टी में होती है, वैसे ही मनुष्य की परख लोगों के द्वारा की गयी प्रशंसा से होती है | - नीति वचन 

⇨  प्रत्येक व्यक्ति प्रशंसा चाहता है | - लिंकन 

⇨  एक बुद्धिमान पुरुष की प्रशंसा उसकी अनुपस्थिति में करनी चाहिए, किन्तु स्त्री की प्रशंसा उसके मुख पर | - वेल्स लोकोक्ति

⇨  प्रतिद्वंद्वी द्वारा की गयी प्रशंसा सर्वोत्तम कीर्ति है | - टामस मूर 

⇨  प्रशंसा के प्रति अनुराग पर ही सदैव किसी जाति का महान प्रयास आधारित रहा है, जैसे उसका पतन विलासिता के प्रति अनुराग में रहा है | - रस्किन 

⇨  प्रशंसा अच्छे गुणों की छाया है, परन्तु जिन गुणों की वह छाया है उन्ही के अनुसार उसकी योग्यता भी होती है | - वेकन 

⇨  अपनी प्रशंसा सुनकर हम इतने मतवाले हो जाते हैं कि फिर हममे विवेक की शक्ति भी लुप्त हो जाती है | बड़े से बड़ा महात्मा भी अपनी प्रशंसा सुनकर फूल उठता है | - प्रेमचन्द 

⇨  मुझे किसी दूसरी वस्तु की इतनी आवश्यकता नहीं है जितनी की आत्म्पूजा की भूख के पोषण की | - अज्ञात 

⇨  अपनी पुस्तकों की प्रशंसा करने वाला लेखक अपने बचचों की प्रशंसा करनेवाली माता के समान है | - डिजरायली 

⇨  किसी के गुणों की प्रशंसा करने में अपना समय व्यर्थ नष्ट न करो, उसके गुणों को अपनाने का प्रयत्न करो | - कार्ल मार्क्स 

⇨  प्रशंसा प्रार्थना से अधिक दिव्य है, प्रार्थना स्वयं का तैयार रास्ता हमे दिखाती है, प्रशंसा वहां पहले से ही उपस्थित रहती है | - यंग 

⇨  स्वर्ण और हीरे के समान, प्रशंसा का मूल्य केवल उसके दुर्लभत्व में ही होता है | - डॉ. जॉन्सन

⇨  प्रशंसा आपके व्यक्तित्व के मूल केन्द्र पर चोट करती है, इससे आप जान सकते हैं कि आपके सामने बैठे व्यक्ति का मानसिक तथा आध्यात्मिक स्तर क्या है | - स्वामी अमरमुनि

⇨  प्रशंसा के वचन साहस बढ़ाने में अचूक औषधि का काम देते हैं | - सुदर्शन 

⇨  प्रशंसा अज्ञान की बेटी है | - फ्रैंकलिन 

⇨  प्रशंसा से बचो, यह आपके व्यक्तित्व की अच्छाइयों को घुन की तरह चाट जाती है |  - चाणक्य 

⇨  प्रशंसा की मीठी अग्नि यमराज के कठोर हृदय को भी मोम बना देती है, तभी तो वह अपने भक्त को अमर होने का वर दे देता है, यह जानते हुए भी कि इस संसार में कोई अमर नहीं है | - वेदान्त तीर्थ 

⇨  प्रशंसा की भूख जिसे लग जाती है, वह कभी तृप्त नहीं होता | - अज्ञात 

⇨  दूसरे की प्रशंसा करना बहुत कम लोग जानते हैं , इसलिए जब भी कोई आपकी प्रशंसा करे तो यह जानने की कोशिश करें कि सामने वाला आपसे आखिर चाहता है क्या है ? - स्वामी गोविन्द प्रकाश 

⇨  प्रशंसा खोजने वालों को वह नहीं मिलती | - खलील जिब्रान

प्रशंसा (Praise)
प्रशंसा (Praise)

Saturday, June 22, 2019

उदारता (Generosity)

उदार कौन है ? ( Who is generous? )  उदार किसे कहेंगे ? ( Who will say liberal? ) उदारता के क्या लाभ हैं ?( What are the benefits of generosity? )   आदि प्रश्नों का सटीक विवेचन किया गया है इस अध्याय में | महात्मा, मनीषी, विचारक एवं धर्म शास्त्र क्या कहते हैं उदारता के सन्दर्भ में, आइये जानें  - 
  
आभारी हूँ मैं उनका जिन्होंने मेरी निंदा करके मुझे सावधान बनाया | - अज्ञात 

⇒ अपने साथ उपकार करने वालों के साथ जो साधुता बरतता है, उसकी तारीफ़ नहीं है | महात्मा तो वह है जो अपने साथ बुराई करनेवालों के साथ भी भलाई करे | - महात्मा गाँधी 

⇒ सुशील, धर्मात्मा और सब मित्र व प्राणियों पर दया करने वाले पात्र बनो | दुनिया की तमाम सम्पत्तियाँ ऐसे पात्र को ही अपना आश्रय बनाती हैं, जैसे पानी नीचे की ओर तथा धुआं आसमान की ओर स्वाभाविक रूप से गति करता है | - विष्णु पुराण 

⇒ दुष्ट अपनी दुष्टता, सर्प अपना विष, सिंह रक्तपान जिस प्रकार नहीं छोड़ता, उसी प्रकार उदार अपनी उदारता नहीं छोड़ता | - स्वामी महावीर 

⇒ उपकार की फसल न बो सको, तो एक पौधा तो तैयार करो | - राज ठाकुर 

⇒ मुर्ख छोटा-सा कार्य आरम्भ करते हैं और उसी में बेचैन हो जाते हैं | बुद्धिमान बड़े से बड़े कार्य आरम्भ करते हैं और निश्चिन्त बने रहते हैं | - माद्य

⇒ उदारता मनुष्य का श्रेष्ट गुण है | - चार्वाक 

⇒ आप दूसरों के दुखों में सहानुभूति रखेंगे तो कल जब आपको उसकी आवश्यकता होगी, तब वे ही लोग आपको अपना सहयोग दिल की गहराइयों से देंगे | - अज्ञात 

⇒ महान उपलब्धियों के लिए हमे कर्म नहीं करना चाहिए, अपितु स्वप्न भी देखना चाहिए, योजना ही नहीं बनानी चाहिए, अपितु विश्वास भी करना चाहिए | - अनातोले फ़्रांस 

⇒ प्राकृतिक नियम के अनुसार सुख उदारता का और दुःख त्याग का पाठ पढ़ाने आता है | इतना ही नहीं, उदारता त्याग को पुष्ट करती है और त्याग को सुरक्षित रखता है | उदारता और त्याग को अपना लेने पर सुखियों और दुखियों में वास्तविक एकता हो जाती है, जिसके होते ही समस्त संघर्ष अपने आप मिट जाते हैं | तब कोई बैर भाव शेष नहीं रहता | - स्वामी शरणानन्द 

⇒ महान व्यक्ति न किसी का अपमान करता है और न उसको सहता है  | - होम 

⇒ उदार मन वाले विभिन्न धर्मों के सत्य देखते हैं, संकीर्ण मन वाले केवल अन्तर देखते हैं | - एक चीनी कहावत 

⇒ 'यह मेरा है यह दूसरे का' ऐसा संकीर्ण हृदय वाले समझते हैं | उदार हृदय वाले तो सारी दुनिया को कुटुम्ब सा समझते हैं | - हितोपदेश

⇒ उदारता उच्च वंश से आती है, दया और कृतज्ञता उसके सहायक हैं | - कार्नेल 

⇒ एक वीर पुरुष किसी से द्वेष नहीं करता, युद्ध की क्षति शान्ति में भूल जाता है और अपने भयंकर शत्रु का भी मित्र की भांति आलिंगन करता है | - काउपर 

उदारता (Generosity)
उदारता (Generosity)


Friday, June 21, 2019

क्षमा (Forgiveness)

क्षमा का दान सबसे बड़ा दान है | वास्तव में क्षमा का जीवन में क्या महत्त्व है ? क्षमा कौन कर सकता है ? क्षमा का क्या लाभ है ? क्षमा करने वाले को क्या प्राप्त होता है ? क्षमा न करने से क्या हानि होती है ? क्षमा किसे करना चाहिए और किसे नहीं ? इन सभी प्रश्नों का शास्त्र - सम्मत विश्लेषण किया है हमारे मनीषियों एवं विश्वविख्यात चिन्तको ने |

Forgiveness is the biggest donation. In fact what is the significance of forgiveness in life? Who can forgive me? What is the benefit of forgiveness? What does the forgiver receive? What is the loss of forgiveness? Who should forgive and not? The science of all these questions has been analyzed by our intellectuals and world renowned thinkers.

जो क्षमा करता है और बीती बातों को भूल जाता है, उसे ईश्वर की ओर से पुरस्कार मिलता है | - क़ुरान 

⇒ जो मनुष्य नारी को क्षमा नही कर सकता, उसे उसके महान गुणों का उपयोग करने का अवसर कभी प्राप्त न होगा | - खलील जिब्रान 

⇒ जिसने पहले कभी तुम्हारा उपकार किया हो, उससे यदि भारी अपराध हो जाये तो भी पहले के उपकार स्मरण करके उस अपराधी को तुम्हे क्षमा कर देना चाहिए | - वेदव्यास 

⇒ दान को सर्वश्रेष्ठ बनाना है तो क्षमादान करना सीखो | - चार्ल्स बक्सन

⇒ क्षमा में जो महत्ता है, जो औदार्य है, वह क्रोध और प्रतिकार में कहाँ ? प्रतिहिंसा हिंसा पर ही आघात कर सकती है, उदारता पर नहीं | - सेठ गोविन्ददास 

⇒ जिसे पश्चाताप न हो उसे क्षमा कर देना पानी पर लकीर खींचने की तरह निरर्थक है | - जापानी लोकोक्ति

⇒ संसार में ऐसे अपराध कम ही हैं जिन्हें हम चाहें और क्षमा न कर सके | - शरतचन्द्र 

⇒ जो लोग बुराई का बदला लेते हैं, बुद्धिमान उनका सम्मान नहीं करते, किन्तु जो अपने शत्रुओं को क्षमा कर देते हैं, वे स्वर्ग के अधिकारी समझे जाते हैं | - तिरुवल्लुवर 

⇒ न तो तेज ही सदा श्रेष्ट है और न क्षमा ही  |- वेदव्यास

⇒ क्षमा मनुष्य का सर्वश्रेष्ठ तथा सर्वोच्च गुण है, क्षमा दण्ड देने के समान है | - बेरन

⇒ दुष्टों का बल हिंसा है, राजाओं का बल दण्ड है और गुणवानों का क्षमा है | - महाभारत

⇒ क्षमा धर्म है, क्षमा यज्ञ है, क्षमा वेद है और क्षमा शास्त्र है | जो इस प्रकार जानता है, वह सब कुछ क्षमा करने योग्य हो जाता है | - वेदव्यास 

⇒ संसार में मानव के लिए क्षमा एक अलंकार है | - बाल्मीकि 

⇒ क्षमा तेजस्वी पुरुषों का तेज है, क्षमा तपस्वियों का ब्रह्म है, क्षमा सत्यवादियों का सत्य है | क्षमा यज्ञ है और क्षमा मनोविग्रह है | - वेदव्यास 

क्षमा (Forgiveness)
क्षमा (Forgiveness)

Thursday, June 20, 2019

भलाई

कहावत है कि 'कर भला, तो भला' | कुछ लोग इसे कोरी कहावत मानते हैं किन्तु यह शाश्वत सत्य है | जिन्हें शंका हो वे आजमा कर देख सकते हैं | स्वार्थवश किया गया कार्य भलाई नहीं | भलाई के सही मायने क्या हैं - आइये जानें  | 

बुरे आदमी के साथ भी भलाई ही करनी चाहिए | रोटी का एक टुकड़ा डालकर कुत्ते का मुँह बन्द कर देना चाहिए |  - शेख़ सादी

⇒ जैसे एक छोटे से दीप का प्रकाश बहुत दूर तक फैलता है, उसी तरह इस बुरी दुनिया में भलाई बहुत दूर तक चमकती है | - शेक्सपियर

⇒ भले बनकर तुम दूसरों की भलाई का कारण बन जाते हैं | - सुकरात 

⇒ जो भलाई करने का सदा प्रयत्न करता है, वह मनुष्य और परमेश्वर दोनों की कृपा प्राप्त करता है | पर जो बुराई की तलाश में रहता है, उसको बुराई ही मिलती है | - नीति वचन 

⇒ जो दूसरों की भलाई करता है वह अपनी भलाई स्वयं कर लेता है | परिणाम में नहीं वरन कर्म करने में ही क्योंकि सुकर्म का भाव ही एक यथेष्ठ पारितोषक है | - सेनेका 

⇒ जो दूसरों की बुराई करते हैं, वे ख़ुद निन्दित होते हैं | - ऋग्वेद

⇒ भगवान् तुम्हारे पदक, डिग्री या सर्टिफिकेट से नहीं जांचेगा, अपितु उन जख्मों के निशानों से जाँचेगा, जो तुम्हारे शरीर भलाई के लिए बने | - एल्बर्ट हुब्बार्ड्स

⇒ मनुष्य जब संसार से जाता है तो भलाई या बुराई ही साथ ले जाता है | - कबीर 

⇒ मानव की भलाई करने के अतिरिक्त और अन्य किसी कर्म द्वारा मनुष्य ईश्वर के इतने निकट नहीं पहुँच सकता | - सिसरो 

⇒ जिसमे उपकार वृत्ति नहीं, वह मनुष्य कहलाने का अधिकारी नहीं | - महात्मा गाँधी 

⇒ भली बातें कड़वी होती हैं, किन्तु उनके कड़वेपन का स्वागत करना चाहिए | क्योंकि उनमें  भलाई निवास करती है | - भर्तृहरि

 ⇒ जो भलाई से प्रेम करता है वह देवताओं की पूजा करता है, आदरणीयों का सम्मान करता है और ईश्वर के समीप रहता है | इमर्सन 

⇒ जो मनुष्य जगत की जितनी भलाई करेगा, उसको ईश्वर की व्यवस्था से उतना ही सुख प्राप्त होगा | - दयानन्द सरस्वती 

⇒ भलाई का मार्ग भय से पूर्ण है, परन्तु परिणाम अत्युत्तम है | - सुदर्शन 

⇒ जो मेरे साथ भलाई करता है, वह मुझे भला होना सिखा देता है | - फुलर 

⇒ पुष्प की सुगन्ध वायु के विपरीत कभी नहीं जाती, परन्तु मानव के सदगुण की महक सब तरफ फ़ैल जाती है | - गौतम बुद्ध 

भलाई
भलाई

Wednesday, June 19, 2019

वाणी

वाणी हमारे जीवन को सर्वाधिक प्रभावित करने वाला गुण है | क्या महत्व है जीवन में वाणी का ? वाणी द्वारा कैसे पाया जा सकता है सुख ? वाणी द्वारा कैसे उपजता है दुःख  ? जीवन में शान्ति और अशान्ति का वाणी से सीधा सम्बन्ध है | आइये देखें क्या कहती है महान विभूतियाँ वाणी के विषय में -

बाणों से बींधा हुआ अथवा फरसे से कटा हुआ वन भी अंकुरित  हो जाता है, किन्तु कटु वचन कहकर वाणी से किया हुआ घाव नहीं भरता | - वेद व्यास 

जो व्यक्ति उपयोगी और अनुपयोगी का अन्तर समझ लेते हैं,  वे कभी व्यर्थ शब्द व्यक्त नहीं करते | - संत तिरुवल्लूर 

कठोर शब्दों में कहे गये हितकर वाक्यों को सुनकर भी मनुष्य रुष्ट हो जाता है | - भास

कम बोलने से मन की शक्ति बढ़ती है | - महात्मा विदुर 

मधुर वचन सुनने में भी और कहने में भी प्रसन्नता देते हैं | लेकिन मधुर वचन अहंकार त्याग से ही सम्भव है | - कबीर 

पशु बोलने के कारण और मनुष्य बोलने के कारण कष्ट उठाते हैं | - बुक्मान 

कोमल उत्तर से क्रोध शान्त हो जाता है | कटु वचन से उठता है | - बाईबिल

कठोर किन्तु हित की बात कहने वाले थोड़े ही होते हैं | - बाल्मीकि 

शब्द से ही श्रृष्टि का उद्गम है और उसी में श्रृष्टि का विनाश और पुनः शब्द से ही श्रृष्टि की नई रचना होती है | - गुरुनानक देव 

प्रश्न का समय पर उपयुक्त उत्तर देना आनन्द प्रदान करता है | उचित समय पर कही गयी बात ज्यादा वजन रखती है | - नीति वचन 

झूठ बोलना तलवार के घाव के समान हैं, घाव भर जायेगा, किन्तु उसका निशान सदा बना रहेगा | - शेख सादी

गाली से प्रतिष्टा नहीं बढ़ती दोनों ओर अपमान है | इस दुनिया में सबसे ज्यादा कमजोर चीज, कठोर बात है | - शरतचन्द्र

हृदय केवल हृदय की बात कर सकता है क्योंकि उसके पास वाणी नहीं होती | - महात्मा गाँधी 

वाणी से भी वाणी की वर्षा होती है | जिस पर इसकी बौछारें पड़ती हैं, वह दिन-रात दुखी रहती है | - बाल्मीकि

वाणी
वाणी


Thursday, June 13, 2019

विचार ( Thoughts )

आपके विचार ही आपको अच्छा-बुरा बनाते हैं| विचारों से ही व्यक्ति महान बनता है और विचारों से ही तुच्छ | सुन्दर विचार व्यक्ति के जीवन को सुखी बनाते हैं एवं अशुद्ध विचार व्यक्ति को दुखों एवं संकटों में फँसा देते हैं | विचारों को शुद्ध, परिपक्व एवं सुदृढ़ बनाएँ इन महान दार्शनिकों के मार्गदर्शन से और पाएँ जीवन का सच्चा आनन्द | 

मैले मन में अच्छे विचार वैसे ही मैले हो जाते हैं जैसे मैले बर्तन में साफ़ पानी अपनी अशुद्धता और पवित्रता को बैठता है | - महात्मा गाँधी 

⇨ सत्य में इतनी शक्ति होती है कि उसकी एक चिंगारी असत्य के पहाड़ी फूस को आसानी से भस्म कर सकती है | प्रेमचन्द

⇨ सुन्दर विचार, अनमोल धन है | - डी. पाल

⇨ विचार के सिवाय जगत और कुछ नहीं | जगत विचार का ही ठोस रूप है | - महर्षि रमण

⇨ मेघ वर्षा करते समय उपजाऊ और बंजर भूमि भेद नहीं करते | इसी प्रकार अपने सुन्दर ह्रदय के विचार धर्मी और अधर्मी दोनों पर व्यक्त करने चाहिएँ |
- तुकाराम 

⇨ बुरे विचार ही हमारी सुख-शान्ति के शत्रु हैं | - स्वेट मार्डेन 

⇨ जो कार्य बल और पराक्रम से पूर्ण हो पाता, उपाय द्वारा वह सरलता से पूर्ण हो जाता है | -  हितोपदेश

विचार ( Thoughts )
विचार ( Thoughts )

Monday, June 10, 2019

"क्या यही है समाज और सामाजिकता "

आज हमें महिलाओं को उसकी असीम अधिकार और क्षमताओं का बोध् कराना होगा और महिलाओं को स्वयं अपनी अस्मिता को पहचानना होगा। ऐसा माना जाता है कि कोई समाज महिलाओं की उपेक्षा करके प्रगति नहीं कर सकता। हमारे प्रथम राष्ट्रपति श्री राजेन्द्र प्रसाद का कथन है - स्त्री के भीतर छिपी परिवर्तनकारी ऊर्जा पृथ्वी को स्वर्गतुल्य बना सकती है। महिलाओं के प्रति बढ़ते हुए अत्याचार हमारी मध्ययुगीन मानसिकता को उजागर करते है। हमें अपनी सोच बदलनी होगी। महिलाएं हमसे किसी मामले में कमतर नहीं हैं,को कभी नकारा नहीं जा सकता है।कुछ राजनीतिक दल महिलाओ के लिए  आरक्षण की माँग करते है मगर चुनाव आते ही टिकट देने मे पीछे हट जाते है। उनकी राजनीतिक हिस्सेदारी ठीक ढंग से ना देना ये क्या बताता है एक तरफ महिलाओ की आरक्षण की माँग करना, दुसरी तरफ राजनीतिक हिस्सेदारी ना देना ये जो दोहरा चरित्र है बड़ा ही विचित्र है।महिलाएं एक दिन में पुरुषों की तुलना में छ: घण्टे अधिक कार्य करती हैं। आज विश्व में काम के घण्टों में 60 प्रतिशत से भी अधिक का योगदान महिलाएं करती हैं जबकि वे केवल एक प्रतिशत सम्पत्ति की मालिक हैं।महिलाओं के लिए नियम-कायदे और कानून तो खूब बना दिये हैं किन्तु उन पर हिंसा और अत्याचार के आंकड़ों में अभी तक कोई कमी नहीं आई है। संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष की रिपोर्ट के अनुसार भारत में 15 से 49 वर्ष की 70 फीसदी महिलाएं किसी न किसी रूप में कभी न कभी हिंसा का शिकार हो होने वाले अत्याचार के लगभग 1.5 लाख मामले सालाना दर्ज किए जाते हैं जबकि इसके कई गुण दबकर ही रह जाते हैं। विवाहित महिलाओं के विरूद्ध की जाने वाली हिंसा के मामले में बिहार सबसे आगे है जहां 59 प्रतिशत महिलाएं घरेलू हिंसा की शिकार हुई। उनमें 63 प्रतिशत शहरी क्षेत्रों की थी।समाज के कुछ मनचले ही दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराधों को अंजाम देने से बाज नहीं आते हैं। ऐसे लोगों को समाज द्वारा ही सजा देनी चाहिए, क्योंकि कानून से बचने के सारे उपायों को यह जानते हैं। और कानून का उनको कोई डर भी नहीं होता है।कई लोग, नेता और समाज के बुद्धजीवी लोग मानते हैं कि लड़कियों को जींस नहीं पहननी चाहिए, अकेले नहीं जाना चाहिए और जल्दी घर आ जाना चाहिए। इन्हीं कारणों से उनके साथ दुष्कर्म होता है। मैं पूछती हूं कि क्या लड़कियों इन सब की आजादी नहीं है? लड़कियों के साथ दुष्‍कर्म होना उनकी दैनिक दिनचर्या नहीं, बल्कि हमारी छोटी सोच इसके लिए जिम्मेदार है।
"क्या यही है समाज और सामाजिकता "
"क्या यही है समाज और सामाजिकता "


"मायका"

सुविख्यात लेखिका 
अमृता प्रितम जी ने *मायके* पर क्या खूब लिखा है:
रिश्ते पुराने होते हैं 
पर "मायका" पुराना नही होता 
उस  देहरी को छोडना आसान नही होता।

पर कुछ अपवाद भी हैं देखें 
शायद कुछ लोग सहमत नहीं होंगे 
कुछ के घाव हरे हो जाएंगे|   
                  "मायका"
किसी मकान को घर कहे ज़माना हो गया 
रिश्ते तो रिश्ते मायका भी पुराना हो गया 
सुना था अलाये बलाये निकाली जाती हैं 
पर हकीकत, अचानक कैसे आयी ये निगाहे बोल जाती
जिस घर का कोना कोना यादों से भीगा होता 
उसी घर में,कहीं कोने में बैठ पानी पीना होता 
वो बचपन के नखरे,रंगीन कटोरी, छोटी ग्लासी 
आज पसंद की कटोरी टूटी देख आये उदासी
पूरे घर में लिपस्टिक,नेलपेंट बिखेरती
आज पर्स का सामान पर्स में रखती
ऐसा नहीं के कुछ कोई लूट ले जाएगा
हां पर माँ कहेगी..रख ले तेरा कुछ छूट जाएगा
वो क्या जाने छूट गया सब कुछ अब क्या लूट जाएगा
छोटी सी बात पर चीख चीख कर शोर मचाती
मुस्कुराए लब,आँखों में आंसू, दिल में दर्द छुपाती
वो ज़िद्द,एक कपड़ा चुनने में घंटो लगाती
आज पल में सबसे कम दाम का उठाती
जब कोई सामान दें माता पिता 
कह देती मुझे नही भाता
जिस घर से दूर होने का विचार ही रूला जाता 
वही बैठने पर घड़ी का कांटा सताता
एक ज़माने में सिर्फ हमारा नखरा चलता 
अब कहते हैं हमारे घर ये नहीं चलता 
बाहर जाते वक़्त मां कहती थी बेटा जल्दी आना 
अब कहती है पहले अपना घर संभालना
कभी हमारी चुलबुली बातों से घर में रौनक छा जाती
वक़्त यूं बदला, जब आती भाषण सुनाती
बचपन में जब दौड़ते भूकंप आता हुडदंग मच जाता
वही आज अदब से चलती तिनका भी बचाती
महलों से उठाकर फेक दिया गलियों में 
अब खुद उस गली में उन्हें गंध है आती
मां बच्चों के लिए दुनिया से लड़ जाती
आज बात बात पर शिकायत दर्ज़ कर जाती
सुना था बच्चे मां पिता के लिए बड़े नहीं होते
मायका पुराना नही होता 
रिश्ते तो रिश्ते मायका पुराना हो गया 
बेगाना हो गया |

आज भी बहोत सी बेटियों के जीवन की सच्चाई है.. 
विडंबना तो ये है कि मायके में पराया धन कहलाती है और ससुराल में कभी अपनाई नही जाती.. पराये घर से आई कहा जाता है.. कोई ये बता दे की बेटियों का घर कौन सा है 
यह एहसास दिल को झिंझोड़ता है;क्योंकि लगभग सभी ज़गह यही दास्तां है...माँ-बाप को ऐसी दकियानूसी सोच से मुक्ति पानी होगी।उनकी जिम्मेदारी सिर्फ़ बेटी की शादी तक नहीं है;बल्कि ताउम्र उसके साथ खड़ा होना है...मानसिक,आर्थिक,सामाजिक...सभी प्रकार के संबल के साथ...ताकि बेटी इस निर्दयी समाज में अपने आप को एक पल की ख़ातिर भी अकेला महसूस न करे। काश! हर माता पिता ऐसा सोचते...  आर्थिक मदद करें या न करें पर... मानसिक तौर पर हमेशा साथ खड़े रहना चाहिए...
 "मायका"
 "मायका"
Priya Batra
(Nagpur)

Sunday, June 9, 2019

हे ! युवाओं ..मत भागों ..! हे ! हिन्दुस्तान के आगामी गौरव ..रुको ..ठहरो ..|

Know your culture and Proud on Your culture.

हे ! युवाओं ..मत भागों ..! हे ! हिन्दुस्तान के आगामी गौरव ..रुको ..ठहरो ..| 
हे ! देश की युवा पीढ़ी जिस विकास की गाड़ी पर तुम बैठना चाहते हो वह अन्धकार की ओर जाती है | मत भागो इसके पीछे | 
जिस आर्यवृत की संस्कृति को पीछे छोड़ रहे हो वास्तव में वही तुम्हारा मूल है वही तुम्हारा प्रकाश है | वही तुम्हारा ज्ञान है | 
Dear Indian Your, Don't follow western culture. Don't become a modern person, become a gentleman and buildup, simple living and high thinking. 

जैसे-जैसे हम बाहरी संस्कृति को अपने देश में शरण दे रहें हैं | वैसे-वैसे ये हमारी संस्कृति का नाश कर रही है | वह दिन दूर नहीं जब यह पश्चिमी सभ्यता हमारी भारतीय संस्कृति को पूर्णतः नष्ट कर देगी | आइये जाने क्या भी हमारी पहचान और क्या थे उसके फ़ायदे | 

गुरुकुल में पढ़ते थे - 
हमारी सभ्यता में गुरुकुल थे | ऋषिमुनि बचचों को समान रूप से ज्ञान देते थे | राजा हो या प्रजा सभी के बच्चे समान रूप से शिक्षा ग्रहण करते थे | कोई भेद-भाव नहीं | यहाँ तक कि भगवान् श्री कृष्ण तथा मर्यादा पुरुषोत्तम राम को भी अपना-अपना राजमहल छोड़कर गुरुकुल जाना पड़ा | यदि चाहते तो वे इतने समृद्ध थे कि महल में ही गुरुओं को बुला सकते थे, परन्तु उन्होंने उस प्राचीन पवित्र परम्परा का सम्मान कर उसका पालन किया | 
क्योंकि बालक जब घर में, समाज में रहकर शिक्षा ग्रहण करता है तब उसका आधा मन घर की चीजों में बंट जाता है | और गुरुकुलों में जब तक शिक्षा-दीक्षा पूरी नहीं हो जाती थी वे बालक वहीँ रहते थे | परिणामस्वरूप वे हर क्षेत्र में निपुण होते थे | 

गुरुकुल में पढ़ते थे
गुरुकुल में पढ़ते थे 


सादा भोजन करते थे -
एक कहावत है कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क निवास करता है और स्वस्थ शरीर बनता है शुद्ध, सात्विक और शाकाहारी भोजन से | भगवान् राम ने चौदह वर्षों तक जंगलों में फलाहार ही किया | और श्री कृष्ण ने माखन-मिश्री का महत्व समझाया | किन्तु आज का ये समाज राक्षस प्रवृति का होता जा रहा है | वह जानवर तो जानवर इंसानों को खाने से भी नहीं चूक रहा है इसका कारण पश्चिमी सभ्यता ही है | 
लेकिन भारत के लोग यह नहीं सोचते कि वे क्यों खाते हैं मांस ...क्योंकि उनके यहाँ अन्न, फल सब्जी आदि पर्याप्त मात्रा में नहीं होते इस कारण | परन्तु हमारा देश कृषि प्रधान देश है यहाँ अन्न की कमी नहीं | 

इमानदार तथा वचन परायण थे - 
इमानदारी हमारी संस्कृति के कण-कण में थी, महाराजा सत्यवादी हरीशचंद्र, महात्मा गाँधी ईमानदारी के साकार मूर्त हैं | और भगवान् श्री राम जिहोने वचन निभाने का सूत्र दिया | 
रघुकुल रीति सदा चलि आयी
प्राण जाये पर वचन न जायी 

ऐसी महान विभूतियों ने इस भारत की धरती पर जन्म लिया परन्तु उनका अनुशरण न कर दूसरे देशों के आडम्बर का चोला पहनने में लगें हैं | 

इमानदार तथा वचन परायण थे
इमानदार तथा वचन परायण थे


बड़ों का आशिर्वाद लेते थे - 
बड़ों के पैर छूकर उनसे आशीर्वाद की पवित्र परम्परा हमारे भारत देश में ही है और कहीं नहीं है | हर छोटे-बड़े काम में बड़ों की राय लेना शुभ माना जाता था और फलदायी भी सिद्ध होता था | 
आज की युवा पीढ़ी बड़ों के पैर छूने में ही स्वयं को लज्जित महसूस करती है उनसे किसी काम में राय लेना तो दूर की बात है | 

बड़ों का आशिर्वाद लेते थे
बड़ों का आशिर्वाद लेते थे


हमारी संस्कृति अर्थात् हमारा मूल ही खतरे में है | परिणाम स्वरुप देश में भ्रष्टाचार, बलात्कार और न जाने कौन-कौन से अपराध दिन-प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं | यदि वास्तव में इन सबको मूलतः नष्ट करना है तो लौट आओ अपनी संस्कृति की ओर ...| 

Saturday, June 8, 2019

हीनता (Inferiority)

हीनता क्या है ? (What is inferiority?) मन में इसका जन्म क्यों होता है ? हीनता के प्रदर्शन से व्यक्ति को क्या हानि होती है ? (What harm does a person suffer from the performance of inferiority?) कैसे पायें हीनता से मुक्ति (How to get rid of inferiority), बता रहे हैं निम्नोक्ति अनमोल वचन | पढ़ें और हों हीनता से मुक्त | 

कीड़ों को रौंदने और शहंशाह के आगे गिडगिडाने से घृणा करें | - शेख सादी

 दीनता-हीनता का प्रदर्शन किसी मनुष्य के समक्ष मत करो, वहां से सिवाय उपहास के कुछ न पाओगे, यदि दीन-हीन बनना है तो ईश्वर के समक्ष बनो जो सबका दाता है | - शब्द प्रकाश 

 अगर कोई आदमी अपने को कीड़ा बना ले तो पद दलित होने पर उसे शिकायत का हक नहीं है | - केंट 

 हीनता हिंसा से भी हीन होती हैं | - मैथिलीशरण गुप्त 

 मनुष्य को कोई ऐसा काम नहीं करना चाहिए, जिससे वह स्वयं को छोटा और हीन समझने लगे | - सन्त ज्ञानेश्वर 

 हीनता का अनुभव करना ही पाप है | - अज्ञात 

 जो पुरुष निरुत्साह, दीन और शोकाकुल रहता है, उसके सब काम बिगड़ जाते हैं और वह अनेक विपत्तियों में फँस जाता | - बाल्मीकि रामायण 

 किसी से मेहरबानी मांगना अपनी आजादी बेचना है | - महात्मा गाँधी 

 क्या तुम लंगड़े हो जो दूसरों का आसरा ताक रहे हो ? - अरस्तु 

 खैरात के हलवे से मेहनत की सूखी रोटी मीठी होती है | - शेख सादी

 विश्व की समस्त शक्तियों हमारी हैं | हमने अपने हाथ अपनी आँख पर रख लिए हैं और चिल्लाते हैं कि सब ओर अँधेरा है | जान लो कि हमारे चारों ओर अँधेरा नही हैं | अपने हाथ अलग करो, तुम्हें प्रकाश दिखाई देगा, जो पहले भी था | कमजोरी कभी नहीं थी | हीनता कहीं नहीं थी | हम सब मुर्ख है जो चिल्लाते हैं कि हम दीन-हीन हैं, कमजोर हैं, अपवित्र हैं | - महर्षि अरविन्द 

  किसी के कृपा भाजन होने से इर्ष्या का पात्र होना अधिक अच्छा है | - अज्ञात 

हीनता (Inferiority)
हीनता (Inferiority)